Pratika Rawal Biography in Hindi – प्रतिका रावल इंटरनेशनल क्रिकेट शतक लगाने वाली चैंपियन खिलाड़ी की जानिए कहानी

कैसे हो क्रिकेट के चाहने वालों, आज हम एक ऐसी खिलाड़ी के बारे में बात करने जा रहे हैं, जिसने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा से क्रिकेट जगत में एक नई पहचान बनाई है। हम बात कर रहे हैं 24 साल की युवा क्रिकेटर प्रतिका रावल की, जिन्होंने आयरलैंड के खिलाफ भारत के लिए अपने पहले एकदिवसीय शतक के साथ इतिहास रच दिया। इस शानदार शतक ने न केवल उनके क्रिकेट करियर को ऊंचाई दी, बल्कि उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट को भी गौरवान्वित किया।

प्रतिका रावल की अद्भुत यात्रा

प्रतिका का जीवन केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है। दिल्ली में जन्मी इस होशियार छात्रा ने मनोविज्ञान में अपनी स्नातक की डिग्री भी प्राप्त की है और इस अध्ययन ने क्रिकेट में उन्हें मानसिक मजबूती प्रदान की। “मैंने मनोविज्ञान के अध्ययन से यह समझा कि खेल में मानसिक स्थिति कितनी महत्वपूर्ण है,” यह प्रतिका के शब्द हैं। उनका मानना है कि क्रिकेट खेलते समय आत्मविश्वास बनाए रखना बहुत आवश्यक है और इसके लिए सकारात्मक मानसिकता को बनाए रखना बहुत जरूरी होता है।

प्रतिका रावल ने अपनी क्रिकेट यात्रा की शुरुआत रोहतक रोड जिमखाना क्रिकेट अकादमी से की, जहाँ उन्होंने कोच श्रवण कुमार के मार्गदर्शन में क्रिकेट सीखा। उनके पिता प्रदीप रावल दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ के BCCI-प्रमाणित अंपायर हैं, और यही क्रिकेट के प्रति उनका लगाव प्रतिका को मिला।

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Pratika Rawal Biography in Hindi - प्रतिका रावल इंटरनेशनल क्रिकेट शतक लगाने वाली चैंपियन खिलाड़ी की जानिए कहानी

Pratika Rawal Biography in Hindi

विवरणजानकारी
नामप्रतिका रावल
जन्म तिथि1 सितंबर 2000
जन्म स्थानदिल्ली, भारत
उम्र24 साल (2024 में)
पिताप्रदीप रावल (BCCI-प्रमाणित अंपायर)
शिक्षामनोविज्ञान में स्नातक (जीसस एंड मेरी कॉलेज, दिल्ली)
खेलक्रिकेट, बास्केटबॉल
बास्केटबॉल में उपलब्धि2019 में 64वें स्कूल नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक जीता।
क्रिकेट की शुरुआतरोहतक रोड जिमखाना क्रिकेट अकादमी से
घरेलू क्रिकेट टीमदिल्ली, रेलवे
वनडे में शतकआयरलैंड के खिलाफ 154 रन (2024)
पसंदीदा क्रिकेट प्रारूपवनडे और टी20
विशेष उपलब्धि2021-22 की सीनियर महिला वनडे ट्रॉफी में 161 रन (असम के खिलाफ)
प्रेरणामनोविज्ञान का अध्ययन क्रिकेट में मानसिक मजबूती देने में मदद करता है।
कैरियर की शुरुआत10 साल की उम्र में क्रिकेट में प्रवेश

बास्केटबॉल में भी थीं चैंपियन

कभी-कभी हमें यह मानने में समय लगता है कि एक ही व्यक्ति में इतनी प्रतिभा हो सकती है। प्रतिका ने बास्केटबॉल में भी स्वर्ण पदक जीते हैं। 2019 में आयोजित 64वें स्कूल नेशनल गेम्स में बास्केटबॉल में गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि वह सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि अन्य खेलों में भी माहिर हैं।

आयरलैंड के खिलाफ ऐतिहासिक शतक

प्रतिका रावल ने हाल ही में आयरलैंड के खिलाफ तीसरे वनडे मुकाबले में अपने पहले वनडे शतक के साथ इतिहास रच दिया। राजकोट के निरंजन शाह स्टेडियम में खेले गए इस मैच में उन्होंने 129 गेंदों पर 154 रन बनाकर भारत को 400 रन के करीब पहुंचाया। इस दौरान उन्होंने 20 चौकों और एक छक्के की मदद से शानदार पारी खेली। प्रतिका की इस पारी ने उन्हें भारत की महिला क्रिकेट टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है।

घरेलू क्रिकेट में शानदार रिकॉर्ड

प्रतिका ने घरेलू क्रिकेट में भी अपने शानदार प्रदर्शन से सबका ध्यान आकर्षित किया। दिल्ली के लिए खेलते हुए उन्होंने कई मैचों में शानदार पारियां खेली। 2021-22 की सीनियर महिला वनडे ट्रॉफी में उन्होंने असम के खिलाफ नाबाद 161 रन बनाकर सभी को हैरान कर दिया। इसके बाद उन्होंने रेलवे के लिए खेलते हुए भी कई महत्वपूर्ण मैचों में अपना जलवा दिखाया।

FAQ: Pratika Rawal Biography in Hindi

प्रतिका रावल का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

प्रतिका रावल का जन्म 1 सितंबर 2000 को दिल्ली में हुआ था।

प्रतिका रावल ने किस खेल में गोल्ड मेडल जीता है?

प्रतिका रावल ने बास्केटबॉल में 2019 के 64वें स्कूल नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था।

प्रतिका रावल के पिता कौन हैं?

प्रतिका रावल के पिता प्रदीप रावल दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ के BCCI-प्रमाणित अंपायर हैं।

प्रतिका रावल ने आयरलैंड के खिलाफ कौन सा रिकॉर्ड स्थापित किया?

प्रतिका रावल ने आयरलैंड के खिलाफ तीसरे वनडे मुकाबले में 154 रन बनाकर अपना पहला वनडे शतक लगाया।

प्रतिका रावल ने क्रिकेट की शुरुआत कहाँ से की थी?

प्रतिका ने अपनी क्रिकेट यात्रा रोहतक रोड जिमखाना क्रिकेट अकादमी से शुरू की थी।

अंतिम शब्द

प्रतिका रावल ने न केवल अपनी मेहनत और संघर्ष से क्रिकेट की दुनिया में अपनी जगह बनाई, बल्कि उनकी बहुमुखी प्रतिभा ने उन्हें एक प्रेरणा बना दिया है। अगर आप भी किसी लक्ष्य के प्रति समर्पित हैं, तो प्रतिका का यह सफर आपके लिए एक प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। क्रिकेट और बास्केटबॉल के अलावा, उन्होंने यह भी सिद्ध कर दिया कि मनोविज्ञान का अध्ययन भी खेलों में मानसिक मजबूती के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकता है।

यह कहानी है एक ऐसे युवा क्रिकेटर की, जिसने न केवल अपनी मेहनत से बल्कि मानसिक दृढ़ता से भी अपने सपनों को सच किया है। द दोस्तों की तरह मैं भी यह कहता हूँ, “आगे बढ़ो, सपना बड़ा देखो, और उसे साकार करो!”

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